आँखें अपनी भिगोता नहींअश्क पीता हूँ रोता नहींइक उसी का मुझे होना हैइक वही मेरा होता नहींउस की तस्वीर पूछे मुझेरात भर क्यूँ मैं सोता नहींसाल भी ख़त्म होने को हैहिज्र ही ख़त्म होता नहीं— Abhay Aadiv