न रहे हम पे ही हमारा बस
करता साया असर तुम्हारा बस
प्यार में डूबते हुए दिल को
चाहिए आप का सहारा बस
ख़्वाब वो एक ख़्वाब ही है अब
ख़्वाब जो ख़्वाब था हमारा बस
इस रिया मंडी में सदाक़त का
सिर्फ़ होता रहा खसारा बस
फिर जुटाना ज़रा 'अभय' हिम्मत
मील कुछ दूर है किनारा बस
— Abhay Aadiv















