बेज़ार कर गई यूँँ इक शख़्स की मुहब्बत

उस ने जो छोड़ा करनी ही छोड़ दी मुहब्बत

लोगों को दर्द मेरा अब अच्छा लग रहा है
करना सिखा रही है ये शा'इरी मुहब्बत

तुम ने अभी कहाँ है समझा बिछड़ने का दुख
समझोगे तुम भला क्या ही ये मिरी मुहब्बत

था पहला इश्क़ 'आदिव' ही उस की ज़िंदगी का
वो मेरी ज़िंदगी की है आख़िरी मुहब्बत

— Abhay Aadiv

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