बेज़ार कर गई यूँँ इक शख़्स की मुहब्बत
उसने जो छोड़ा करनी ही छोड़ दी मुहब्बत
लोगों को दर्द मेरा अब अच्छा लग रहा है
करना सिखा रही है ये शाइरी मुहब्बत
तुमने अभी कहाँ है समझा बिछड़ने का दुख
समझोगे तुम भला क्या ही ये मिरी मुहब्बत
था पहला 'इश्क़ 'आदिव' ही उसकी ज़िंदगी का
वो मेरी ज़िंदगी की है आख़िरी मुहब्बत
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Abhay Aadiv
our suggestion based on Abhay Aadiv
As you were reading Zindagi Shayari Shayari