दे रही है यूँंँ दुनिया दिखाई मुझे

दिख रही है सभी में बुराई मुझे

तेरी दुनिया में कोई यूँंँ कितना जिए
वक़्त से पहले दे दे रिहाई मुझे

दिल है वीरान कब से मगर जाने क्यूँंँ
शोर सा दे रहा है सुनाई मुझे

पास रह कर भी मेरे नहीं जो क़रीब
ऐसी कु़र्बत से अच्छी जुदाई मुझे

मैं किसी की दु'आओं में शामिल नहीं
किस ने ये बद-दुआ' है लगाई मुझे

दूर दुनिया से रह कर किताबें पढ़ी
सारी दुनिया घुमा कर वो लाई मुझे

तीरगी में भटकते भटकते 'अभय'
मिल गई एक दिन रौशनाई मुझे

— Abhay Aadiv

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