ये तो दौर-ए-आदम से लाज़िम अदब है
बला-ए-मोहब्बत भी यारों अजब है
तेरा हुस्न तेरी अना ख़ैर रब्बा
वो ही दरगुज़र कर दे गरचे वो रब है
सितारों से पूछो मेरा हाल अब तुम
यूँँ ही करवटों में लिपटती ये शब है
यहाँ पर हुजूमी है दानिश ज़माना
यहाँ सादगी तो बड़ी ख़ुश्क लब है
तेरी पीठ के दाग़ को मैं संवारूॅं
दिवाना हूँ तेरा यही इक तलब है
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