hawaaein tez theen ye to faqat bahaane the | हवाएँ तेज़ थीं ये तो फ़क़त बहाने थे

  - Aashufta Changezi

हवाएँ तेज़ थीं ये तो फ़क़त बहाने थे
सफ़ीने यूँँ भी किनारे पे कब लगाने थे

ख़याल आता है रह रह के लौट जाने का
सफ़र से पहले हमें अपने घर जलाने थे

गुमान था कि समझ लेंगे मौसमों का मिज़ाज
खुली जो आँख तो ज़द पे सभी ठिकाने थे

हमें भी आज ही करना था इंतिज़ार उस का
उसे भी आज ही सब वादे भूल जाने थे

तलाश जिन को हमेशा बुज़ुर्ग करते रहे
न जाने कौन सी दुनिया में वो ख़ज़ाने थे

चलन था सब के ग़मों में शरीक रहने का
अजीब दिन थे 'अजब सर-फिरे ज़माने थे

  - Aashufta Changezi

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