yaaron siyaah raat men bas khaamoshi ke saath | यारों सियाह रात में बस ख़ामुशी के साथ

  - Aasif Munawwar

यारों सियाह रात में बस ख़ामुशी के साथ
अल्फ़ाज़ बुन रहा हूँ बड़ी नाज़ुकी के साथ

मैं बेवक़ूफ़ था जो हवाओं को छोड़कर
दुनिया की सैर करने चला था नदी के साथ

तुम हो अमीर तुमको मुबारक हो माल-ओ-ज़र
खिलवाड़ तो न कीजे मिरी मुफ़लिसी के साथ

होश-ओ-हवास सारे उड़ा कर चली गई
इक साँवली सी लड़की बड़ी सादगी के साथ

इक आरज़ू रही है ये बचपन से आज तक
दरिया की तह में जाऊँ किसी जलपरी के साथ

  - Aasif Munawwar

Dariya Shayari

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