भरता कोई नहीं बस रीत रहा है जीवन
प्यासा-प्यासा तेरे बिन बीत रहा है जीवन
हौसला जुट रहा लहरों की सदाएँ सुनकर
धीरे-धीरे ही सही जीत रहा है जीवन
मौसम-ए-हिज्र भी हँस के है बिताया हमने
इसलिए एक मधुर गीत रहा है जीवन
पत्थरों से पटी धरती पे उगे हैं अंकुर
पत्थरों को हरा के जीत रहा है जीवन
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