इक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
कैसे बच पाएँगे झाँसे और भी तो हैं
माँ दवा दारू तेरी कैसे कराऊँ
कहती है बीवी कि बेटे और भी तो हैं
चाहने की वजह यह बिल्कुल नहीं है
इस जहाँ में चाँद-चेहरे और भी तो हैं
तोहमतें इक दूजे पे हम क्यूँँ लगाएँ
दूर जाने के बहाने और भी तो हैं
बंद मत करिए पिलाते रहिए मुझको
पास मेरे राज़ गहरे और भी तो हैं
टूटे पैरों से भी नपते हैं हिमालय
हौसला मत तोड़ रस्ते और भी तो हैं
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