ik se badh ke ek vaade aur bhi to hain | इक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं

  - Aatish Indori

इक से बढ़ के एक वादे और भी तो हैं
कैसे बच पाएँगे झाँसे और भी तो हैं

माँ दवा दारू तेरी कैसे कराऊँ
कहती है बीवी कि बेटे और भी तो हैं

चाहने की वजह यह बिल्कुल नहीं है
इस जहाँ में चाँद-चेहरे और भी तो हैं

तोहमतें इक दूजे पे हम क्यूँँ लगाएँ
दूर जाने के बहाने और भी तो हैं

बंद मत करिए पिलाते रहिए मुझको
पास मेरे राज़ गहरे और भी तो हैं

टूटे पैरों से भी नपते हैं हिमालय
हौसला मत तोड़ रस्ते और भी तो हैं

  - Aatish Indori

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