ik to hasti ko tere jaisa banaa baithe hain | इक तो हस्ती को तेरे जैसा बना बैठे हैं

  - Aatish Indori

इक तो हस्ती को तेरे जैसा बना बैठे हैं
फिर भी इल्ज़ाम है हम पर कि भुला बैठे हैं

हम तो रोते ही हैं उसको भी रुला बैठे हैं
'इश्क़ वाला उसे भी रोग लगा बैठे हैं

रोज़ दोहराता हूँ मैं साथ बिताए लम्हात
उनको फिर भी है शिकायत कि भुला बैठे हैं

अब चमत्कार कोई हमको बचा पाएगा
ख़ुद को तल-हीन समंदर में डुबा बैठे हैं

बाग़ में हमको खिलाने थे मुहब्बत के फूल
झाड़-झंखाड़ उदासी के उगा बैठे हैं

  - Aatish Indori

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