ख़ुद को सस्ता नहीं बना सकता

मैं तमाशा नहीं बना सकता

राब्ता सिर्फ़ दो से बाक़ी है
और अच्छा नहीं बना सकता

हो चुकी है खंडर इमारत ये
उस को अपना नहीं बना सकता

सब लकीरें हैं हाथ की टेढ़ी
सीधा रस्ता नहीं बना सकता

उस ने गिरगिट से रंग बदले हैं
उस को अपना नहीं बना सकता

ख़ूब पैसे बनाए हैं लेकिन
एक क़तरा नहीं बना सकता

— Aatish Indori

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