Darpan
Darpan
Ghazal

इक दुनिया में पूरी दुनिया की आबादी होती है, इक दुनिया में मैं होता हूँ इक शहज़ादी होती है

उन को दूर किया जाता है जो बरसों के साथी हैं,
और अनजाने लोगों की आपस में शादी होती है

पंछी ज़िंदा खौफ़ लिए उड़ता है दूर दराज़ों तक
पिंजरे के खुल जाने से कैसे आज़ादी होती है?

देखो कितने ख़ुश हैं आशिक़ जो पहले ये कहते थे,
इश्क़ मुहब्बत के चक्कर में बस बर्बादी होती है

वीर जवानों के जज़्बों की गाथाएं ही अमृत हैं
जिन को बस सुन लेने से छाती फ़ौलादी होती है

'दर्पन' को अब रोना धोना सुनने की आदत सी है
जो भी मिलता है उस की फितरत फरियादी होती है

दर्पन ©

— Darpan

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