बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान कोभूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान कोशबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकूनपेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को— Adam Gondvi