dard phir se hai ugaa cigarette la | दर्द फिर से है उगा सिगरेट ला

  - Ambar

दर्द फिर से है उगा सिगरेट ला
मन बड़ा विचलित हुआ सिगरेट ला

दो पहर तो कट गए आराम से
सांझ आई दिन ढला सिगरेट ला

क्या हुआ क्यूँँ और कैसे छोड़ सब
दुखती रग को मत दबा सिगरेट ला

मेरी जीवन की लड़ी से इस ही पल
हो न जाए हादसा सिगरेट ला

साँस लेना चाहता हूँ चैन की
मुझको जीता जागता सिगरेट ला

रूह को ठंडक दिलाने के लिए
है वही इक आसरा सिगरेट ला

  - Ambar

More by Ambar

As you were reading Shayari by Ambar

Similar Writers

our suggestion based on Ambar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari