Ambar
Ambar
Ghazal

दर्द फिर से है उगा सिगरेट ला

मन बड़ा विचलित हुआ सिगरेट ला

दो पहर तो कट गए आराम से
सांझ आई दिन ढला सिगरेट ला

क्या हुआ क्यूँ और कैसे छोड़ सब
दुखती रग को मत दबा सिगरेट ला

मेरी जीवन की लड़ी से इस ही पल
हो न जाए हादसा सिगरेट ला

साँस लेना चाहता हूँ चैन की
मुझ को जीता जागता सिगरेट ला

रूह को ठंडक दिलाने के लिए
है वही इक आसरा सिगरेट ला

— Ambar

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