mere dil men jaag raha hai phir se dard puraana sa | मेरे दिल में जाग रहा है फिर से दर्द पुराना सा

  - Ambar

मेरे दिल में जाग रहा है फिर से दर्द पुराना सा
बिन पूछे ही घर कर बैठा बंदा इक अनजाना सा

मेरे वतन की मिट्टी की ही ख़ुशबू आती है उस सेे
लगता है वो शख़्स न जाने क्यूँँ जाना पहचाना सा

कल तक तो था सब कुछ मेरा तेरे विदा हो जाने से
अपने घर के आँगन में ही लगता हूँ बेगाना सा

बचपन उसका क्यूँँ छीनूं क्यूँँ रोकूँ शरारत करने से
मेरे अंदर भी है बालक मैं भी हूँ बचकाना सा

ले चल मुझको उन गलियों में जी लूँ मैं फिर से वो पल
बड़े दिनों के बाद मिले हैं छेड़ वही अफ़साना सा

  - Ambar

Gulshan Shayari

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