आँख में ख़्वाब हैं साँस में ख़ुशबू दिल का मौसम अच्छा है
यार ये तेरी याद की साज़िश है या मौसम अच्छा है
एक बहाना चाहिए था बस ख़ुद से बाहर आने का
उन आँखों में ख़ुद को देखा सोचा मौसम अच्छा है
हम ने जलती लौ के डर से ख़ुद को हब्स में रक्खा था
ख़्वाहिश की खिड़की खोली तो देखा मौसम अच्छा है
उस से दूर तो सारे मौसम इक जैसे हो जाते हैं
वो हो पास तो फिर क्यूँ सोचें कैसा मौसम अच्छा है
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