कलियों से 'इश्क़ कर न बहारों से 'इश्क़ कर
लेना है लुत्फ़-ए-इश्क़ तो ख़ारों से 'इश्क़ कर
बर्बाद कर दिया न तुझे तेरे शौक़ ने
किसने कहा था तुझ से हज़ारों से 'इश्क़ कर
हाल-ए-शब-ए-फ़िराक़ सुनाता है किस लिए
तन्हाइयों में चाँद सितारों से 'इश्क़ कर
दुनिया को छोड़ छाड़ के चल दीन की तरफ़
करना है तो रसूल के प्यारों से 'इश्क़ कर
साहिल पे बैठ बैठ के होगा न दरिया पार
तूफ़ान कह रहा है तू धारों से 'इश्क़ कर
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