पलकें सारी रात बिछाए रखते हैं
पर आँखों को ख़्वाब सुलाए रखते हैं
तेरी इन रेशम ज़ुल्फ़ों के साए में
हम चाहत के फूल उगाए रखते हैं
आँखें, गेसू, ख़ुशबू, चेहरा, उसका दिल
हम किस किस के नाज़ उठाए रखते हैं
बारिश जब होती है तेरी यादों की
तकिया ये दिन रात भिगाए रखते हैं
हम सुलगाए जाते हैं सिगरिट हर दम
इन होंटो से आग लगाए रखते हैं
पागल लड़की हम को शा'इर कहती है
हम भी उसका वहम बनाए रखते हैं
इस महफ़िल में जिसको देख रहें है सब
वो बस हम पर आँख जमाए रखते हैं
शे'र बना कर तेरे बख़्शे ज़ख़्मों को
महफ़िल का माहौल बनाए रखते हैं
मुझको सय्यद बस सय्यद की चाहत है
वो ये कह कर शहर जलाए रखते हैं
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