ab ke jo laut kar main tire paas aaunga | अब के जो लौट कर मैं तिरे पास आऊँगा

  - Dharmesh bashar

अब के जो लौट कर मैं तिरे पास आऊँगा
तुझको बिठा के सामने ग़ज़लें सुनाऊँगा

है ज़िन्दगी की नब्ज़ तिरे इख़्तियार में
रूठेगी ज़िन्दगी तो मैं तुझको मनाऊँगा

कब तक यूँँ ही अँधेरे में खाऊँगा ठोकरें
सोचा है अबके घर में कोई चाँद लाऊँगा

शायद मिरे मिज़ाज से वाक़िफ़ नहीं है तू
तू ज़ुल्म भी करेगा तो मैं भूल जाऊँगा

जीने की आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर
किस तरह आईने को मैं सूरत दिखाऊँगा

छाए तो उनके फूल से चेहरे पे मुर्दनी
हँस-हँसके अपने ज़ख़्मों को ख़ुद गुदगुदाऊँगा

उनके बग़ैर कैसे कटी है 'बशर' हयात
पूछेंगे जब वो मुझ सेे तो मैं क्या बताऊँगा

  - Dharmesh bashar

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