ज़ख़्म-ए-जिगर दिखाने को तैयार हम नहीं
तुम हो अगर तबीब तो बीमार हम नहीं
परिवार से मिली है विरासत में जो हमें
नीलाम करने वाले वो दस्तार हम नहीं
कैसे क़बीला लुट गया हम सेे न पूछिए
कह तो दिया क़बीले के सरदार हम नहीं
ज़ालिम को ज़ुल्म ढाने से मतलब है ढाएगा
तुम चुप रहो या चीख़ो गुनहगार हम नहीं
हम बे-सबब तिरी सभी बातों में आ गए
तक़दीर है तेरी कि समझदार हम नहीं
कैसी अजीब भूक है दौलत की भूक भी
धनवान कह रहे हैं कि दातार हम नहीं
किरदार अपना आख़िरी दम तक निभाएँगे
शाइर हैं हम अगरचे अदाकार हम नहीं
सिक्कों में तौल देते हैं अपनी क़लम को जो
जानो 'बशर' कि ऐसे क़लमकार हम नहीं
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