mohabbat se inaayat se vafaa se chot lagti hai | मोहब्बत से इनायत से वफ़ा से चोट लगती है

  - Bashir Badr

मोहब्बत से इनायत से वफ़ा से चोट लगती है
बिखरता फूल हूँ मुझ को हवा से चोट लगती है

मेरी आँखों में आँसू की तरह इक रात आ जाओ
तकल्लुफ़ से बनावट से अदास चोट लगती है

मैं शबनम की ज़बाँ से फूल की आवाज़ सुनता हूँ
'अजब एहसास है अपनी सदास चोट लगती है

तुझे ख़ुद अपनी मजबूरी का अंदाज़ा नहीं शायद
न कर अह्द-ए-वफ़ा अह्द-ए-वफ़ा से चोट लगती है

  - Bashir Badr

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