sau khuloos baaton mein sab karam khayaalon mein | सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में

  - Bashir Badr

सौ ख़ुलूस बातों में सब करम ख़यालों में
बस ज़रा वफ़ा कम है तेरे शहर वालों में

पहली बार नज़रों ने चाँद बोलते देखा
हम जवाब क्या देते खो गए सवालों में

रात तेरी यादों ने दिल को इस तरह छेड़ा
जैसे कोई चुटकी ले नर्म नर्म गालों में

यूँ किसी की आँखों में सुब्ह तक अभी थे हम
जिस तरह रहे शबनम फूल के प्यालों में

मेरी आँख के तारे अब न देख पाओगे
रात के मुसाफ़िर थे खो गए उजालों में

जैसे आधी शब के बा'द चाँद नींद में चौंके
वो गुलाब की जुम्बिश उन सियाह बालों में

  - Bashir Badr

Khushboo Shayari

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