aaiine se parda kar ke dekha jaa.e | आईने से पर्दा कर के देखा जाए

  - Bharat Bhushan Pant

आईने से पर्दा कर के देखा जाए
ख़ुद को इतना तन्हा कर के देखा जाए

हम भी तो देखें हम कितने सच्चे हैं
ख़ुद से भी इक वा'दा कर के देखा जाए

दीवारों को छोटा करना मुश्किल है
अपने क़द को ऊँचा कर के देखा जाए

रातों में इक सूरज भी दिख जाएगा
हर मंज़र को उल्टा कर के देखा जाए

दरिया ने भी तरसाया है प्यासों को
दरिया को भी प्यासा कर के देखा जाए

अब आँखों से और न देखा जाएगा
अब आँखों को अंधा कर के देखा जाए

ये सपने तो बिल्कुल सच्चे लगते हैं
इन सपनों को सच्चा कर के देखा जाए

घर से निकल कर जाता हूँ मैं रोज़ कहाँ
इक दिन अपना पीछा कर के देखा जाए

  - Bharat Bhushan Pant

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