सब सोचते थे पहले कि क़िस्मत का हाथ है
मैंने कहा भी सब सेे कि मेहनत का हाथ है
मैं शेर-ओ-शायरी की बदौलत यहाँ पे हूॅं
सब कहते है कि इस
में उस औरत का हाथ है
हाथों में आपके है लकीरें तबाही की
यानी हर एक हाथ मुसीबत का हाथ है
कैसे मेरी ज़मीन रक़ीबों में बँट गई
क्या इस
में आप ही की हुकूमत का हाथ है
ज़ख़्मों को मैं सबूत बनाकर कहाँ फिरूँ
हर सम्त उसके साथ अदालत का हाथ है
दोनों के बीच फ़ासले आने थे आ गए
और इस
में तो फ़क़त मेरी ग़ुर्बत का हाथ है
लैला से पहले जैसा भी था क़ैस क़ैस था
मजनूँ बनाने में तो मोहब्बत का हाथ है
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