जिस को अपने आप का पता नहीं
अस्ल में उसे ख़ुदा पता नहीं
एक शख़्स हँस रहा था जो अभी
ज़िन्दगी थी ख़्वाब था पता नहीं
वो नसीहतें न दें तो ख़ैर हो
जिन को मेरा मसअला पता नहीं
एक तो सियाह रात का सफ़र
और मुझ को रास्ता पता नहीं
जुस्तजू रही है जिस की अब तलक
वो मिला नहीं मिला पता नहीं
कैसा जोग लग गया मुझे विकल
हिज्र का विसाल का पता नहीं
— Deepak Vikal















