Meaning of

क़ाफ़

qaaf • قاف

क़ अक्षर; पहाड़ों की श्रंखला; बाधाओं का प्रतीक

letter Q; a mountain range; a metaphor for obstacles

ق حرف; پہاڑوں کی قطار; رکاوٹوں کی علامت

Arabic

उसे क्या ही पता होगा इबादत किस को कहते है
मुझे पूछा जो करती थी मोहब्बत किस को कहते है

सभी वादें सभी क़स
में सनम निकले महज़ क़िस्से
तसव्वुर से मैं ने सीखा हक़ीक़त किस को कहते है

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ज़िंदगी यूँँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे

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हम क़ाफ़िले से बिछड़े हुए हैं मगर 'नबील'
इक रास्ता अलग से निकाले हुए तो हैं

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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ
मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया

तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था
तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया

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राब्ता लाख सही क़ाफ़िला-सालार के साथ
हम को चलना है मगर वक़्त की रफ़्तार के साथ

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मेरे शाइ'र! मैं वही हुस्ने-दिलावेज़, जिसे
चाहने वाले बहुत, जानने वाले कम हैं

25

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'मजरूह' क़ाफ़िले की मिरे दास्ताँ ये है
रहबर ने मिल के लूट लिया राहज़न के साथ

19

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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उसे क्या ही पता होगा इबादत किस को कहते है
मुझे पूछा जो करती थी मोहब्बत किस को कहते है

सभी वादें सभी क़स
में सनम निकले महज़ क़िस्से
तसव्वुर से मैं ने सीखा हक़ीक़त किस को कहते है

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ज़िंदगी यूँँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

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क़ाफ़, यह अक्षर, एकाकी और ऊँचा खड़ा होता है, जैसे क्षितिज पर फैली पहाड़ों की श्रंखला। कविता में, यह उन दुर्जेय चुनौतियों का प्रतीक है जिन्हें जीवन की यात्रा में पार करना होता है। इसका अनोखा आकार रहस्य और गहराई का आभास कराता है।

कवियों द्वारा 'क़ाफ़' का प्रयोग अक्सर दुर्जेय बाधाओं की छवि उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। यह हृदय के आंतरिक संघर्षों या दुनिया द्वारा प्रस्तुत बाहरी चुनौतियों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यह शब्द 'साहिल' (किनारा) के विपरीत है, जो ज्ञात से अज्ञात की यात्रा का सुझाव देता है।

क़ाफ़ मानव आत्मा की दृढ़ता का प्रमाण है। यह कवि को अज्ञात की विशालता का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करता है।