Meaning of

क़िला

qila • قلعہ

किला; दुर्ग

fort; stronghold

قلعہ; قلعہ بند

Arabic

शा'इरी से इंक़िलाब आए तो कैसे
सुन के सब ताली बजाने में लगे हैं


शे'र ‘कर्कश’ कौन महफ़िल में सुनेगा

लोग सारे नाच गाने में लगे हैं

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कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है

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बहुत बर्बाद हैं लेकिन सदा-ए-इंक़लाब आए
वहीं से वो पुकार उठेगा जो ज़र्रा जहाँ होगा

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देख रफ़्तार-ए-इंक़लाब 'फ़िराक़'
कितनी आहिस्ता और कितनी तेज़

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इंक़लाब आएगा रफ़्तार से मायूस न हो
बहुत आहिस्ता नहीं है जो बहुत तेज़ नहीं

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बिन तेरे मेरा घर भी लगे घर नहीं
ऐसा मानो की पंछी हो पर, पर नहीं

जल महल हो या हो आगरा का किला
तुम सा शीतल नहीं तुम सा सुंदर नहीं

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जब तक कि आदमी को सुकूँ की तलाश है
सौ इंक़िलाब आएँगे इक इंक़िलाब क्या

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"शहीद-ए-आज़म भगतसिंह"
आँखों में वो आँसू नहीं

कुछ ख़्वाब सँजोया करता था
वतन की आज़ादी के ख़ातिर

खूनी आँसू रोया करता था
आज़ादी का दीवाना था वो

रगों में उबाल ख़ानदानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
अंगारों पर चल कर जिस ने

एक नई राह बनाई थी
उस मतवाले शे'र ने क़सम

आज़ादी की खाई थी
चाहे उम्र कम रही हो लेकिन

वो एक लंबी कहानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जिस के दिल में सिर्फ़ और सिर्फ़

इन्कलाब की आग थी
आँखों में थी जलती ज्वाला

लिबास जिस का त्याग थी
हर दिल में निशाँ छोड़ गया वो

भारत माँ की निशानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था
जब तक धरती-अम्बर होंगे

मिट न सकेगा नाम तुम्हारा
भारत का हर बच्चा-बच्चा

याद रखेगा काम तुम्हारा
समुंदर से भी गहरा था जो

ख़ुद में ही एक रवानी था
जिस ने सब कुछ लुटा दिया अपना

वो वीर भगत बलिदानी था

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फ़क़त ग़ुलामियों का नर्म-सा क़दम है इश्क़ भी
ये बात और है कि नाम इंक़िलाब का दिया

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मैं पहले भी तो तुम से ये कह चुका हूँ
मुश्किल से शब-ए-हिज्र को सह चुका हूँ

कभी नींव पक्की मोहब्बत की थी जिस की
वही मैं किला हूँ जो अब ढ़ह चुका हूँ

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शा'इरी से इंक़िलाब आए तो कैसे
सुन के सब ताली बजाने में लगे हैं


शे'र ‘कर्कश’ कौन महफ़िल में सुनेगा

लोग सारे नाच गाने में लगे हैं

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कोई तो सूद चुकाए कोई तो ज़िम्मा ले
उस इंक़िलाब का जो आज तक उधार सा है

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क़िला शक्ति और सुरक्षा की छवियाँ उत्पन्न करता है, बाहरी दुनिया की अराजकता के खिलाफ एक गढ़। कविता में, यह भौतिक और भावनात्मक किलों दोनों का प्रतीक है, सुरक्षा और अलगाव का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि 'क़िला' का उपयोग रक्षा और एकांत के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह हृदय की बाधाओं या मन के आश्रयों का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द अक्सर असुरक्षा और खुलेपन के विपरीत होता है।

क़िला सुरक्षा और अलगाव की द्वैत प्रकृति का प्रमाण है।