मैं पहले भी तो तुम से ये कह चुका हूँमुश्किल से शब-ए-हिज्र को सह चुका हूँकभी नींव पक्की मोहब्बत की थी जिस कीवही मैं किला हूँ जो अब ढ़ह चुका हूँ— Kohar