Meaning of

क़ुर्बत

qurbat • قربت

निकटता; समीपता; अंतरंगता

closeness; proximity; intimacy

قربت; نزدیکی; محبت

Arabic

उकता न कहीं जाएँ क़ुर्बत से तिरी जानाँ
अच्छा हो जो कुछ दिन की फ़ुर्क़त भी अता करते

4

Download Image

जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए

38

Download Image

बातचीत में आला हो बस ठीक न हो
फ़ाइदा क्या महबूब अगर बारीक न हो

हम तेरी क़ुर्बत में अक्सर सोचते हैं
दरिया खेत के इतना भी नज़दीक न हो

37

Download Image

भले हैं फ़ासले क़ुर्बत से ख़ौफ़ लगता है
ये क्या बला है जो ऐसी विरानी क़ैद हुई

24

Download Image

सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है
जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की

23

Download Image

कैसी बिपता पाल रखी है क़ुर्बत की और दूरी की
ख़ुशबू मार रही है मुझ को अपनी ही कस्तूरी की

20

Download Image

ऐसी हैं क़ुर्बतें के मुझी में बसा है वो
ऐसे हैं फ़ासले के नहीं राब्ता नसीब

7

Download Image

अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया

6

Download Image

किसी ने हिज्र अता कर के ज़िन्दगी छीनी
किसी ने ज़ख़्म दिए जो भरे नहीं अब तक

सखी सभी को मुयस्सर हैं क़ुर्बतें तेरी
बस एक हम हैं जो तुझ से मिले नहीं अब तक

6

Download Image

ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे

4

Download Image

उकता न कहीं जाएँ क़ुर्बत से तिरी जानाँ
अच्छा हो जो कुछ दिन की फ़ुर्क़त भी अता करते

4

Download Image

जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए

38

Download Image

'क़ुर्बत' शब्द मूल रूप से शारीरिक या भावनात्मक निकटता को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर अंतरंगता की गर्माहट और किसी प्रिय व्यक्ति या वस्तु के पास होने के आराम को व्यक्त करता है। यह अपनापन और हमें बांधने वाले गहरे संबंधों की भावना को जागृत करता है।

कवि 'क़ुर्बत' का उपयोग निकटता की सुंदरता और आत्माओं को जोड़ने वाले बंधनों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम का उत्सव हो सकता है या उसकी अनुपस्थिति का विलाप।

कविता में, 'क़ुर्बत' उन संबंधों की कोमल याद दिलाता है जो हमें पोषित और बनाए रखते हैं। यह प्रेम की स्थायी उपस्थिति की बात करता है।