hawle hawle se jo chalti hai hawa raat ga.e | हौले हौले से जो चलती है हवा रात गए

  - divya 'sabaa'

हौले हौले से जो चलती है हवा रात गए
खिज के रह जाती है ये दिल की फ़ज़ा रात गए

मेरी साँसों में तिरे जिस्म की ख़ुशबू है बसी
दिल में जो शोर मचाती है सदा रात गए

तिश्नगी लब पे सजाए हुए दिल कहता है
आज बरसेगी मिरी छत पे घटा रात गए

रक़्स करती हुई लहरों का है जादू मुझपर
चाँदनी देती है मौजों को हवा रात गए

एक साया है मिरी ज़ीस्त का हासिल उसको
मोम पिघला तो बढ़ी और ज़िया रात गए

वाक़िया याद है जब आलम-ए-तन्हाई में
हाथ मेरे थे सनम बंद-ए-क़बा रात गए

हाए लब काँप गए और थी ख़ामोश 'सबा'
और ख़ुश-रंग हुए दस्त-ए-हिना रात गए

  - divya 'sabaa'

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