तुमको किसी सूरत तो वफ़ादार करेंगे
हम और नया बुत कोई तैयार करेंगे
क्या जानते थे हम कि छलक जाएँगी आँखें
इस तरह मुहब्बत का वो इज़हार करेंगे
जिस बात पे तुम खिल के हुए जाते हो गुलशन
इक बार नहीं बात वो सौ बार करेंगे
वो आएँगे मालूम है क्या होगा तमाशा
इनकार करेंगे कभी इज़हार करेंगे
दामन की नहीं ख़ैर बहारों की क़सम है
हम होश को रुसवा सर-ए-बाज़ार करेंगे
साक़ी भी है मुतरिब भी है और मस्त घटा है
ज़ाहिद को सबा हम तो गुनहगार करेंगे
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