सारी ख़ुश-फ़हमी शुऊर-ओ-फ़लसफ़ा पानी हुआ
वो उधर बोले इधर मेरा कहा पानी हुआ
भीगते लहजे में क्या करते कोई इज़हार-ए-हाल
लब से जो निकला वही हर्फ़-ए-दुआ पानी हुआ
मुझ से मिल कर गुम हुए यूँँ उसकी हस्ती के नुक़ूश
वो कि जैसे बर्फ़ था मुझ को छुआ पानी हुआ
शाइरी में क्या करें ता'रीफ़ हम इस हुस्न की
देख कर मेरा सरापा आइना पानी हुआ
यूँँ ही आँखों में नहीं आ जाते आँसू दोस्तो
दर्द का एहसास अब हदस बढ़ा पानी हुआ
हम ने आख़िर फिर वफ़ा की लाज रख ली ऐ सबा
लेकिन इस कोशिश में अपने ख़ून का पानी हुआ
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