कौन है जग में मेरे महाकाल साहै मुसीबत में मेरी वो इक ढाल साहै ये संसार कैसा बताऊँ जो मैंबस रहा है ये माया के इक जाल साभक्ति भोले की कर के ही मिलता है सुखहै ये जीवन भी वर्ना तो पामाल सा— Shivam Mishra