मैं उसे अब तो पाना नहीं चाहता

राह में उस की आना नहीं चाहता

ठोकरें मैं बहुत खा चुका हूँ यहाँ
अब कभी टूट जाना नहीं चाहता

वो न मेरा रहा मैं न उस का रहा
अब बहाने बनाना नहीं चाहता

मैं ने की थी वफ़ा वो रहा बे-वफ़ा
और कुछ भी बताना नहीं चाहता

मैं ने सब कुछ सहा और कुछ नईं कहा
और आँसू बहाना नहीं चाहता

अब सफ़र में कहीं खो न जाऊँ 'शिवम्'
मंजिलों तक जो जाना नहीं चाहता

— Shivam Mishra

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