दुनिया के मसअले हैं अलग और मेरे अलग
दोनों के इसलिए भी रहे रास्ते अलग
वो इक अलग मिज़ाज का महबूब है करन
होंगे तमाम सिलसिले और तजरबे अलग
देखें तो रतजगों में कोई फ़र्क़ ही नहीं
सोचें तो हिज्र-ओ-वस्ल के हैं रतजगे अलग
इस फ़ैसले की एक वजह हो तो कुछ कहें
क्या-क्या सबब बताएँ कि हम क्यूँ हुए अलग
ऐसे भी दिन हुए हैं मुहब्बत में जब सहर
ख़्वाहिश हमारी और थी पर फ़ैसले अलग
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