फिर कोई चेहरा ख़फ़ा होने को है
आइना अब आइना होने को है
जिसको सोचा भी न था वो मिल गया
जिसको चाहा वो जुदा होने को है
ख़ुद-ब-ख़ुद भर आई हैं आँखें मेरी
हो न हो कुछ हादिसा होने को है
सोचिए मत पल में क्या-क्या हो गया
देखिए बस क्या से क्या होने को है
वो मेरी रातों की बेचैनी से अब
सुब्ह की ताज़ी हवा होने को है
किस ग़रज़ से पास आ बैठो हो तुम
हम सेे तुमको क्या नफ़ा होने को है
आदमी की आज है किल्लत बहुत
जिसको देखो वो ख़ुदा होने को है
गिन रहा हूँ आख़िरी साँसें क़ज़ा
ख़ुश तो है तेरा कहा होने को है
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