इतना तो दूर जा कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
मत छोड़ नक्श-ए-पा कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
इस ज़िंदगी में हर घड़ी मसरूफ़ियत रही
मौक़ा'' नहीं मिला कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
मर तो रहा हूँ मैं तेरी चारागरी के बिन
इतना नहीं मरा कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
मैं ने तमाम ज़िंदगी सो कर गुज़ार दी
मुझ को ये हुक्म था कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
अव्वल तो ढूँढ़ना है मुझे अपने आप को
ऐसी न धुन बजा कि तुझे ढूँढ़ता फिरूँ
— Karan Sahar















