aankhoñ se maine dard ko azaad kar diya | आँखों से मैंने दर्द को आज़ाद कर दिया

  - Harsh Kumar Bhatnagar

आँखों से मैंने दर्द को आज़ाद कर दिया
कुछ इस तरह से साक़ी के प्याले को भर दिया

सीने में क़ब्ल से ही फ़क़त साँस बाक़ी थी
छू कर बदन को उसने मिरे ख़ूॅं से भर दिया

मैं एक मशवरा तो फ़क़त सब को देता हूँ
जाने दे उसको जिसने भी ज़ख़्म-ए-जिगर दिया

ता-उम्र इंतिज़ार करूँँगा मैं इस क़दर
तूने तो वक़्त मुझको भले साल-भर दिया

कुछ इसलिए भी रूठा है इस ज़िंदगी से "हर्ष"
क्यूँ उसके जाने पर ही ग़ज़ल का हुनर दिया

  - Harsh Kumar Bhatnagar

More by Harsh Kumar Bhatnagar

As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Writers

our suggestion based on Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari