है तमन्ना ये मिरी कोई तमन्ना न रहे
साँस तो चलती रहे आँख में क़तरा न रहे
मेरी ख़्वाहिश है कि इमदाद मिले सब को यहाँ
इक दु'आ ऐसी करूँँ कोई भी अंधा न रहे
बारहा देख मगर साथ में आँखें भी झपक
बात भी कर कि तुझे बाद में शिकवा न रहे
दोस्ती ऐसी हो ता-उम्र तुझे याद रखें
और गर इश्क़ हो तो कोई भी पर्दा न रहे
दिल अगर टूटे तो फिर दोनों का ऐसा टूटे
मैं किसी का न रहूँ तू भी किसी का न रहे
As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar
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