हिजरत के रास्ते कोई आसान तो नहीं
सब पूछते हैं आप परेशान तो नहीं
पहले भी इक दफ़ा ये हुआ है तुम्हारे साथ
इस बार सोच लेना कि नुक़्सान तो नहीं
तिरछी नज़र से उस की तरफ़ देखते हुए
मैं सोचता हूँ उस की तरफ़ ध्यान तो नहीं
तो क्या ये पूछना सही है इस ज़माने से
चुप्पी को साध लेने से हैरान तो नहीं
पहले तो दिल तबाह किया और फिर बदन
ऊपर से कह रहे हैं परेशान तो नहीं
As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar
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