naa-karda jurm kii tujhe koii saza mile | ना-कर्दा जुर्म की तुझे कोई सज़ा मिले

  - Harsh Kumar Bhatnagar

ना-कर्दा जुर्म की तुझे कोई सज़ा मिले
तू जब भी आँख मीचे तो इक वसवसा मिले

तुझको पता लगेगा मिरे साथ क्या हुआ
बदले में एतिबार के जब भी दग़ा मिले

ये ठीक तो नहीं है मगर फिर भी ऐ ख़ुदा
दरिया को मेरी आँख से इक रास्ता मिले

ये ज़िंदगी है फ़र्द की मानिंद मेरे दोस्त
अगले वरक़ पे ज़ख़्म को शायद हवा मिले

फिर भी दु'आ करेगा तिरे वास्ते वो शख़्स
उसको भले ही भीख में कुछ भी बचा मिले

ये भी ख़ुदा की ही कोई तरकीब होगी दोस्त
दरिया में डूबते हुए जब ना-ख़ुदा मिले

  - Harsh Kumar Bhatnagar

More by Harsh Kumar Bhatnagar

As you were reading Shayari by Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Writers

our suggestion based on Harsh Kumar Bhatnagar

Similar Moods

As you were reading undefined Shayari