nikal jaayega dam to phir bachega kuchh nahin | निकल जाएगा दम तो फिर बचेगा कुछ नहीं

  - Harsh Kumar Bhatnagar

निकल जाएगा दम तो फिर बचेगा कुछ नहीं
सिवाए राख के दुनिया को मिलना कुछ नहीं

तरफ़दारी भी अब करने से क्या ही होगा दोस्त
समुंदर के मुक़ाबिल तो ये दरिया कुछ नहीं

मैं हर मुश्किल को अब आसान कह देता हूँ पर
मुझे मालूम है कहने से होना कुछ नहीं

मैं घर की कुर्सियों को तोड़ने वाला हूँ अब
पिता के बाद अब इस घर में अच्छा कुछ नहीं

तो क्या तक़सीम करना ही हुनर है आपका
हमारे बीच में यानी रहेगा कुछ नहीं

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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