aaj dil gam-zada hai mira | आज दिल गम-ज़दा है मिरा

  - Harsh Kumar Bhatnagar

आज दिल गम-ज़दा है मिरा
दर्द से राब्ता है मिरा

जब से गुज़रा गली से है वो
दिल धड़कने लगा है मिरा

मैं मिलूँगा वहीं पर जहाँ
घर भी सहरा-नुमा है मिरा

जब छुआ उस ने दरवाज़े को
घर महकने लगा है मिरा

देखे पा-बा-हिना उसके जब
घर ये मातम-कदा है मिरा

जब से तू छोड़ कर है गया
दिल भी वहशत-भरा है मिरा

तुझ में ही तो जहाँ दिखता है
तू ही हर्फ़-ए-दुआ है मिरा

रात कट जाती है ग़ज़लों में
दिन में तू आसरा है मिरा

काश मुझको तू देखे कभी
चेहरा हल्का-नुमा है मिरा

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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