tumhein mujhko bhulaane ka bahaana mil gaya hai | तुम्हें मुझको भुलाने का बहाना मिल गया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

तुम्हें मुझको भुलाने का बहाना मिल गया है
सुना है तुम को 'आशिक़ वो पुराना मिल गया है

पड़े रहते थे ख़ल्वत में ज़माने से परे जो
उन्हें भी ग़म सुनाने का ठिकाना मिल गया है

बचा कुछ भी नहीं था मेरा यूँँ तो ज़लज़ले में
न जाने फिर कहाँ से ख़त पुराना मिल गया है

ख़फ़ा होने लगा हूँ आजकल की पिक्चरों से
मुझे जब से वो नुसरत का तराना मिल गया है

ख़िज़ाँ में उड़ गए थे जब परिंदे भी हवा में
शजर को काटने का इक बहाना मिल गया है

  - Harsh Kumar Bhatnagar

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