paazeb ki aawaaz hi ab goonjti hai kaan men | पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूँजती है कान में

  - Manohar Shimpi

पाज़ेब की आवाज़ ही अब गूँजती है कान में
होगी जहाँ भी तू कहीं लेकिन रहेगी ध्यान में

तारे कहाँ रौशन हुए सूरज बिना ऐ हम-नशीं
वो ही चमक देखी अभी तेरे मेरे अरमान में

ऐसा कोई मंज़र न ही पहले कभी देखा यहाँ
मेरे ख़ुदा इस शहर को रखना तेरे इम्कान में

हम एक ही हैं हम-नवा कोई बड़ा छोटा कहाँ
फिर इस जहाँ में फ़र्क़ क्यूँ इंसान की पहचान में

फ़ितरत अगर है नेक तो होगा सभी का ही भला
ऐ हम-नफ़स तू देख है कितनी दुआ ईमान में

क्यूँ काहिली को ही जगह कोई मिले इस दौर में
सच में कमी है ही नहीं अब तो किसी इंसान में

  - Manohar Shimpi

Sooraj Shayari

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