उस्लूब से तहज़ीब-ए-कुहन बोल रहा है

  - Manohar Shimpi

उस्लूब से तहज़ीब-ए-कुहन बोल रहा है
हर शख़्स से करने को जतन बोल रहा है

हर बार लड़ा और वो करतूत से हारा
ख़ुद के ही किए को वो गबन बोल रहा है

राफ़ेल सुखोई भी तो तैयार ही हैं अब
फिर कैसे वो उनका ही गगन बोल रहा है

आतंक रगों में ही भरा जब भी दिखे तो
हैवान वही हैं ये ही मन बोल रहा है

हैं कौन निगहबान तुम्हारा ही बताओ
ये अस्ल में तुम सेे ही कफ़न बोल रहा है

हालात पे लिखने से दिखेगा जो हुआ है
अब दर्द सहेंगे वो वतन बोल रहा है

तारीख़ ही तय अस्ल में सब कुछ ही करेगी
अशआर पिरोये जो वो फ़न बोल रहा है

  - Manohar Shimpi

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