चुरा क्यूँँ रहे हैं नज़र आप भी ना
न ही ग़ैर हूँ मैं मगर आप भी ना
अगर हो ख़फ़ा तो बयाँँ क्यूँँ न करते
उसी का हुआ क्या असर आप भी ना
ग़म-ए-दिल रहा ही नहीं अब कोई भी
इनायत हुई है मगर आप भी ना
झुकी सी निगाहें मेरी ढूँढती हैं
शब-ए-वस्ल को ही मगर आप भी ना
कहीं बात मेरे लिए चल रही है
कहाँ आपको है ख़बर आप भी ना
कई बार देखा निगाहें चुरा के
कही बात दिल की मगर आप भी ना
मुझे देखते ही यहाँ आ गए हो
अभी तो उठाओ नज़र आप भी ना
ज़ुबाँ और दिल में बहुत है 'मनोहर'
अभी आप जाओ न घर आप भी ना
Read Full