खुले आसमाँ का किनारा दिखा है
कई दूर से फिर नज़ारा दिखा है
बहुत ख़ूबसूरत लगे आसमाँ जब
चमकता कोई फिर सितारा दिखा है
सफ़र में मिला जो क़रीबी लगे है
वो हमराह ही तो हमारा दिखा है
शराब-ए-हक़ीक़त कहाँ अस्ल में है
किसी शख़्स का वो सहारा दिखा है
पराया लगा वो मुझे दूर से ही
तेरी आँख से ही वो प्यारा दिखा है
कहाँ जाम कोई किसी का छलकता
वही आज कल का सहारा दिखा है
वही दिल-कशी है वही आरज़ू है
'मनोहर' वो दिलकश नज़ारा दिखा है
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