शे'र सुनने के लिए इरशाद कहते हैं सभी
दाद देते और ज़िंदाबाद कहते हैं सभी
हाँ हमिय्यत के बिना जीना लगे दुश्वार है
हाथ जकड़े और फिर आज़ाद कहते हैं सभी
इक नज़र से जब बदल जाए फ़ज़ा भी हम-नशीं
इसलिए लगता तुम्हें दिल-शाद कहते हैं सभी
कर्ब से जीना क़ज़ा ही है किसी के भी लिए
ऐसे रहने को कहाँ आबाद कहते हैं सभी
आज के सय्याद भी होते बड़े चालाक हैं
ज़ाल फैला के किया बर्बाद कहते हैं सभी
खेल बचपन का मनोहर खेलता ही कौन है
अब खड़े होकर कहाँ तादाद कहते हैं सभी
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