मुश्किलों से ही भरे थे दिन वो सारे
ना-ख़ुदा बनके हमीं आए किनारे
'उम्र भर का साथ अब होता नहीं है
आज रहता कौन है किसके सहारे
हुस्न के भी रंग अब रंगीन होते
देखने से ही हसीं दिखते नज़ारे
कौन अपना कौन फिर था ही पराया
साथ में थे वो हुए कब ही हमारे
ऐ मुहब्बत मुश्किलों का ही सफ़र है
'इश्क़ कैसे फिर रहे आसान प्यारे
आसमाँ में गर्द उड़ती है 'मनोहर'
इसलिए खोते भटकते हैं सितारे
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